साथियों आप
सभी का व्हाट्स एप पर बने ग्रुप मे तारीफ़ वाली बातें पढ़ कर मैं अभिभूत हो गया ।
वास्तव में मेरा मन्तव्य कभी तारीफ़ पाने का तो था ही नहीं । या यूं कहे कि ऐसी कल्पना का तो कोई मतलब ही नहीं था । अभी
भी नहीं है ।
मेरा आप सबसे
एक ही निवेदन है कि ब्लोग्ग में लिखी गई बातों में अगर आप को कुछ अतिरेक लगे तो
उसमें कटौती करने के लिये कृपया टिप्पणी करें । इसी प्रकार से अगर कुछ कमी रहती है
तो उसे भी टिप्पणी के द्वारा इंगित कर मार्गदर्शन करें । मक्सद एक ही है कि इस मंच
को निरीक्षक साथी अपनी समस्याओं, अपने उद्गारों
, अपने नवाचारों के लिये उपयोग कर सकें ।
अपने नौकरी के
दौरान हम लोग बहुत कुछ कहना, सुनना, होते हुए देखना चाहते है परन्तु अनेक कारणों से व्यक्त नहीं कर सकते हैं ।
हममें से अधिकांश लोग अभिव्यक्त करने में उतने पारंगत नहीं होते हैं या अन्तरमुखी
होने के कारण या संकोचवश अपनी बात सभी के सम्मुख नहीं रख सकते हैं । बहुत बार
हमारे साथी तो कभी अधिकारी भी उत्साहित करने के बजाय कटाक्ष कर देते हैं जिससे मन
की बात मन में ही घुट कर रह जाती है ।
नौकरी के
शुरुआत से ही हम अपने को आर. ए. एस. परीक्षा पास होकर आने के गुमान से नहीं निकल
पाते है । कम से कम दस साल तो इसी में ही निकल जाता है । सीखने का और सम्मान बनाने
का सबसे बेहतर अवधि यही होती है । उसके बाद नकारात्मकता से कब घिर जाते हैं हमे
पता ही नहीं चलता । आज के डिजिटल युग में हम लोगों को ऐस मंच उपलब्ध हैं जहां हम
अपने विचार को साझा कर सकते हैं तथा सथियों की राय प्राप्त कर सकते हैं । चूंकि
हमारा कार्यक्षेत्र सहकारिता नियत हो गया है । ऐसे स्थिति में हमारी उपादेयता क्या
हो सकती है इस पर मन्थन किया जाना अपेक्षित है । एक तरफ़ इनपुट तो दूसरी तरफ़ आउटपुट
है ।
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