बुधवार, 13 मई 2015

सहकारी निरीक्षकों के ग्रुप बनने से समस्त राजस्थान के निरीक्षकगण व्हाट्स एप पर लगातार अपने विचार / उदगार व्यक्त कर रहे हैं । मेरे एक साथी ने फोन पर अपनी शिकायत में बताया कि केवल पंद्रह से बीस लोग ही रूचि ले रहे हैं । यह बात एकदम सही है कि अधिकाँश लोग न तो अपने पोस्ट लिखते है और न ही प्रतिक्रिया ही व्यक्त करते हैं । मेरा मानना है कि इससे उनकी उदासीनता नहीं दीखती है । बल्कि अपने सर्विस काल के अधिकाँश समय वे लोग कभी एक दूसरे के संपर्क में रहे ही नहीं और अचानक उन्हें अन्यों के पोस्ट व्हाट्स एप जैसे प्लेटफॉर्म पर  देखने को  मिल रहा है । मेरी दृष्टि में इस युगांतरकारी तकनीकी साधन के प्रभाव को आत्मसात करने में कुछ समय लगेगा । लेकिन इस मंथन से बहुत कुछ अच्छा निकलेगा । 2 मई 2015 के दिन सहकार भवन के कन्फ़रेन्स हाल में निरीक्षक साथियों के वक्तृत्त्व क्षमता को देखकर पहली बार लगा कि साथियों में दम है ।
प्रथमतः पूरे राजस्थान के निरीक्षकगण एक तरह से सोचेंगे । सभी अपनी राय एक मंच पर व्यक्त करेंगे । इससे एकरूपता विकसित होगी । अभी सभी को अपने एसोसिएशन के गठन कराने की चिंता है । अपने सर्विस सम्बन्धी परिस्थितियों को  अनुकूल  बनाने की कोशिश करनी है ।
मुझे इसमें इससे बड़ी उम्मीद बनी है । निरीक्षकों के सामने आने वाली बड़ी चुनौतियों को इस मंच पर साझा किया जाना चाहिए । इस क्रम में विचारण हेतु निम्न मुद्दों पर सभी की प्रतिक्रिया अपेक्षित है ।
1- निरीक्षकों का कार्य स्पष्ट होना चाहिए । कभी हम लोग दिन दौरा और रात्रि विश्राम की वर्त्तमान स्थिति ढूढने लगते है कभी हम सर्किल रजिस्टर संधारित करने के लिए मूल आंकड़े इकट्ठे करने लगते है । निरीक्षक का अपना कोई कार्यालय नहीं होता है । जिले के तहसील या पंचायत समिति स्तर पर निरीक्षक का  कोई अपना कार्यालय नहीं होता है । कोई सहकर्मी नहीं होता है । कभी मार्केटिंग में तो कभी बैंक शाखा में बैठने को कहा जाता है । स्टेशनरी और कार्यालय संचालन हेतु सामग्री अपेक्षित होती है ।
2- निरीक्षक के पद के साथ - साथ मार्केटिंग के अतिरिक्त कार्य को भी आवंटित किया जाता है । अगर निरीक्षक नहीं चाहे तो भी उसे अतिरिक्त कार्य दे दिया जाता है । जबकि जो मार्केटिंग के कार्य में शिद्धहस्त होते है उन्हें सामान्यतया नहीं दिया जाता है । मार्केटिंग का कार्य अपने में विशिष्ट प्रकार का कार्य होता है । किन परिष्टितियों में किया जाता है यह केवल भुक्तभोगी ही बता सकता है । यह कार्य सामूहिक रूप से सभी कार्मिकों के द्वारा मिलकर किया जाता है परन्तु निरीक्षक के कार्यकाल  के दौरान अगर कोई अनियमितता हो जाती है  तो ऐसा लगता है की उसके द्वारा ही किया गया है । उसे अपने बचाव में बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं । जब संस्था का लाभ हानि संस्था के सदस्यों की होती है । सभी कार्मिक बोर्ड के अधीन होकर काम करते हैं तो अनियमितता के उत्तरदायित्त्व के  लिए भी बोर्ड को क्यों नहीं शामिल किया जाता है । नई संस्था गठन कर दी जाती है परन्तु योग्य  कार्मिक की भर्ती नहीं होने से संस्था प्रभावित होती है । न्यूनतम वेतन पर योग्य कार्मिक नहीं मिल पाता है । नई गठित  ग्राम सेवा सहकारी समितियों तथा क्रय विक्रय सहकारी समितियों में इस  प्रकार की स्थिति ज्यादा देखने को मिल रही है ।
3- कहना तो नहीं चाहिए परन्तु साथी निरीक्षक भी अपने कार्य में पारंगत होने को प्राथमिकता नहीं देते हैं । वार्षिक नक़्शे का कार्य हो या अवसायन हो अथवा जांच हो हममे से अधिकांश लोग पारंगत नहीं होते हैं । हमारी ट्रेनिंग व्यवस्था भी एक एक की स्थानीय परिस्थितियों को देखे बिना ही करा दी जाती है । वास्तव में हम सभी चुप रहकर या यूं कहे कि प्रतिक्रियाविहीन होकर अपने को ज्यादा निरापद स्थिति में पाते हैं । ज्यादा बोलने पर समस्याएं भी ज्यादा हिस्से में मिल जाती हैं ।
4- निरीक्षक संवर्ग में से आत्महीनता का बोध निकालने की कोशिश कभी हुई ही नहीं । वैसे देखा जाय तो अपने विभाग के अधिकारियों में भी यह स्थिति है । इसके लिए हम लोगों का काम और उसमें योग्यता के अनुसार कार्य आवंटन नहीं होना भी एक कारण है । क्यों वही साथी अन्य पद मिलने पर सफल रहता है जबकि इस पद पर सामान्य रहता है ।
5- नौकरी के शुरुआत में आडिटर बनाम कार्यकारी का विवाद रहता था जो टीसता था । भगवान का शुक्र है कि वर्त्तमान में इससे निजात मिल गई है ।
6- जब किसी संस्था का पंजीयन किया जाता है उस समय बहुत लोग रूचि लेते है परन्तु जब संस्था अवसायन में आ जाती है तो उसके रेकॉर्ड तक ढूंढने में जोर आ जाता है । जैसे रजिस्ट्रेशन में बिना पूछे  कर दिया जाता है वैसे ही विज्ञापन निकालकर ऐतराज के बाद पंजीयन क्यों नहीं रद्द कर दिया जावे । अंतिम अवसायन के पहले अंतिम आम सभा बुलाने की औपचारिकता क्यों बनायी गई है । जब संस्था को चलाने में सदस्यगण रूचि नहीं ले रहे है  तभी तो अवसायन में आयी है । अंतिम आम सभा में वे सदस्य क्योंकर आएंगे । परन्तु निरीक्षक जो अवसायक भी है उसे अंतिम आम सभा बुलाने में सदस्यों को इकट्ठा करने में कितना जोर आता है । यहां फर्जी उपस्थिति भी लगाकर कार्य को किनारे लगाने में किसी को कोई ऐतराज नहीं होता है परन्तु गलत तो गलत है |
7- मुझे तीस वर्षों में भी कैश बुक लिखने में दिक्कत आती है । लेखों की जानकारी होने के बावजूद कैश बुक लिखने में मैं अपने आप को कई मौकों पर असमर्थ पाता हूँ । ऐसी स्थिति में नए लोग कैसे काम करते होंगे । मुझे याद है कि मेरे साथी जो जयपुर से स्थानांतरित होकर आये थे परन्तु उन्हें और उनसे भी वरिष्ठ को वार्षिक नक़्शे तैयार करने नहीं आता था जबकि नियम से सम्बंधित मुद्दों पर वे बहुत उम्दा थे ।  कार्य के दौरान विभिन्न अवसरों पर ऐसे मौके आते है जब हमें अपनी सीमाएं पता चलती हैं इस प्रकार के मुद्दों पर विचार करने हेतु  यह प्लेटफॉर्म बहुत उपयोगी साबित हो सकता है । क्योंकि इस प्लेटफॉर्म पर  अभिव्यक्त करने में कोई खतरा नहीं है । सभी के रचनात्मक प्रतिभा का उपयोग इस प्लेटफॉर्म पर किया जा सकता है ।


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