दोस्तों मुझे सहकारी विभाग में काम करते हुए पर्याप्त समय हो गया परन्तु आज भी सहकारी समितियों के चुनाव कराने जाते समय बहुत तनाव का अहसास होता है । क्योंकि गांव के लोग जो कि सहकारी समितियों के सदस्य होते हैं कभी-कभी अत्यन्त भावुक होकर व्यवहार करने लगते हैं । उस समय तार्किक और विधिक रुप से उन्हें सन्तुष्ट कर पाना आसान नहीं होता हैं । आंशिक चुनाव में पुलिस जाब्ता भी नहीं के बराबर होता है । परन्तु लोगों की भावनायें उसी तरह की होती हैं । अकेला इन्सान कैसे चुनाव कराता है यह हम लोगों की मानसिक स्थिति को तौलकर ही जाना जा सकता है ।
यहां मैं यह भी स्पष्ट कर दूं कि जब आम चुनाव होता है तब वही प्रक्रिया बडे स्तर पर क्रियान्वित होते और उसमें तमाम संसाधनों का उपयोग होते देखने पर हमें अपने पर गर्व करने का मन करता है । पर इसकी आम मान्यता नहीं मिलने से अपने अन्दर तुच्छता का भाव भी पनपता है । खैर राजकीय कार्य को तमाम सीमाओं के बीच हमारे जैसे न जाने कितने लोग अंजाम दे रहे हैं और अपने को राज्यकर्मी होने के सुखद अहसास से महिमामंडित कर खुश हैं । मैं भी उनमें से ही एक हूं । कल सांगरिया ग्राम सेवा सहकारी समिति के अध्यक्ष का चुनाव कराने जाना है । भगवान से प्रार्थना है कि सब कुछ सकुशल सम्पन्न हो जाये ।
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