शनिवार, 7 जुलाई 2012

सहकारिता में व्यक्तिगत मान अपमान



बहुत दिनों के बाद आज मुझे समय मिला कि मैं कुछ लिख सकूं । मन में बहुत बातें आती है जिसे लिखने का मन करता है । परन्तु कई सीमाओं का अहसास होते ही मन अपनी सीमाओं को समझ कर मन मार लेता है ।
खैर मैं आज एक बहुत असामान्य बात को सबके सामने रखना चाहता हूं । सहकारिता मे कुछ अधिकार सबको निर्बाध रुप से मिला हुआ है जैसे खुली सदस्यता, कार्यक्षेत्र मे निवास करने वाले सदस्यों को समिति के द्वारा दी जाने वाली सुविधाएं । मैं आज कल एक ऐसे प्रकरण की जांच से जुड़ा हूं जिसमें समिति अध्यक्ष अपने सदस्य को वैचारिक मतभेद होने के कारण ॠण सुविधा से वंचित करने के लिए निर्णय ले लियए  है तथा सभी के सुझावों के बावजूद मात्र अपने मान-अपमान की बात करते हैं । साथ ही जब इस प्रकार के प्रकरण राजनीतिक आयाम से जुड़ जाते है तो समझ ही लीजिए कि सामान्य कर्मी की स्थिति क्या होती है ? कर्मी अपने सर्वाइवल इन्सटिन्क्ट का सहारा लेने को मजबूर हो जाता है ।  

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