आज 28.04.2015 की तैयारी बैठक से बहुत अच्छा संदेश मिला है
कि सभी निरीक्षक सामूहिक शक्ति बढाने के लिये पूरी तरह से कृत्संकल्प हैं । जयपुर पदस्थापित
निरीक्षक भाईयों को साधुवाद । साथियों के विचारों से यह तथ्य भी सामने आया कि किसी
- किसी को इस मुहिम से जुड़े कुछ बातों को लेकर भ्रांति है जैसे कि चंदा को लेकर । किसी
भाई का यह विचार कि चंदा लेकर निरीक्षक साथी धन उगाही करेंगे जिसे लगभग सभी ने एक स्वर
में नकार दिया । निश्चित रुप से इतना जल्दी किसी पर आरोप लगाना अपने ओछेपन तथा अपनी
जड़ता का प्रतीक है । उम्मीद और विश्वास के सहारे ही सामूहिकता का विकास होता है । आगे
चलने वालों को यह विचार करना ही होगा कि आज के अविश्वास के युग में विश्वास जगाना बहुत
दुष्कर कार्य है । सोये हुये को जगाना और निश्चल को सक्रिय करना भी कम मुश्किल कार्य
नही है । परन्तु उन्हें यह भी विश्वास होना चाहिये कि बहुतों में उन्होंने आशा
जगाई है । साथ ही स्वयं का विश्वास भी और ज्यादा दृढ़ करना होगा । बहुत जल्दी आहत होने
से काम नहीं चलेगा । जय सहकार ।
मंगलवार, 28 अप्रैल 2015
सोमवार, 27 अप्रैल 2015
सहकारी निरीक्षकों द्वारा व्हाट्स एप पर ग्रुप बनाकर अपने संवर्ग के
हितों के लिये एकजुट होने की मुहिम चलाना देखकर बहुत अच्छा लगता है । मन में दबी कुचली आकांक्षा मूर्त रुप ले रही हो तो
मन की मुराद पूरी होने की कहावत चरितार्थ होती प्रतीत होती है । नये साथियों को इस
कार्य के लिये साधुवाद ।
अभी 2 मई 2015 को निरीक्षकों के लक्षित
एसोशिएसन की पहली बैठक की तिथि नियत की गई है । इस बैठक की सफ़लता के लिये पूर्व
तैयारी स्वरूप 28 अप्रैल 2015 को जयपुर
पदस्थापित निरीक्षकों की एक संक्षिप्त बैठक आयोजित की जा रही है ।
इस हेतु सभी ने मिलकर विभिन्न जिलों में पदस्थापित साथियों का नाम
एवम उनका मोबाइल नम्बर संकलित किया है जिससे सभी से संवाद स्थापित हो सके । मेरे
पूरे सेवा काल मे विभिन्न अंचलों के निरीक्षकों का इस तरह स्वयंस्फूर्त होकर जुडना
आत्मविभोर करने जैसा है ।
मुझे इस सबमें जो बहुत अच्छी बात लगती है कि इससे आत्म सम्मान बढता
है । जरुरी नहीं है कि इससे तात्कालिक लाभ हो परन्तु दीर्घ अवधि में इससे सामूहिक
क्षमता निश्चित रुप से बढती है । इसकी सफलता के लिये सभी को अपने मेढकीय स्वभाव को
त्यागना, अन्यों को भी महत्त्व देना, सामूहिक महत्त्व के लिये अपने व्यक्तिगत हित को छोडना
तथा सबसे जरुरी अपने राजनीतिक महात्वाकांछा को मर्यादित रखना होगा । जय सहकार ।
शनिवार, 11 अप्रैल 2015
राजस्थान सहकारिता विभाग के निरीक्षकगण का एसोसिएशन या संघ
कुछ समय से राजस्थान सहकारिता विभाग के निरीक्षकगण अपने संवर्ग की बेहतरी के लिए अपना एसोसिएशन या संघ बना कर अपनी आवाज को उठाने की कोशिश कर रहे है । यह देख और सुनकर बहुत अच्छा लग रहा है । वास्तव में निरीक्षक के पद पर नौकरी शुरू करना और इसी पद पर रिटायर हो जाना कितना अखरता है । यह केवल भुक्तभोगी ही बयां कर सकता है ।
इसी क्रम में कुछ दिनों पहले मेरे ऑफिस के दोस्त ने व्हॉट्सएप पर एक ग्रुप से जुडवा दिया । ग्रुप के सदस्यों की बौद्धिकता से मैं बहुत प्रभावित हुआ । कुछ दिनों बाद ही निरीक्षकगणों के दूसरे ग्रुप से भी जुड़ गया । व्हाट्सएप्प पर सभी के विचारों से पता चला कि वे लोग निरीक्षकों को एक मंच पर लाने की कोशिश कर रहे हैं । इसी से प्रेरित होकर मैं यह लिख रहा हूँ ।
राजस्थान सरकार के विभिन्न विभागों के निरीक्षकों की स्थिति सहकारी विभाग के निरीक्षकों से बेहतर है । बेहतरी को पाने के लिए सभी को एकजुट होना सबसे पहली आवश्यकता है । इस क्रम में सभी निरीक्षकों का नाम , ऑफिस का नाम , फोन नं- आदि एक जगह संकलित होना प्राथमिक कार्य है ।
उम्मीद करता हूँ कि इस दिशा में यह प्लेटफार्म भी एक साधन का काम करेगा ।
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