गुरुवार, 5 जनवरी 2012

सहकारिता से परिचय

 भगवान को कोटिशः नमन कि आज हम लोग इस योग्य बन सके है कि अपनी बात को सबके सामने यूँ रख सकते है ताकि सभी उसे पढ़ और उसपर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते है | मै अपने सभी साथियों, मार्गदर्शकों, अग्रजों से निवेदन करता हूँ कि वे अपना  मार्गदर्शन देकर  मेरे इस तुच्छ  अदने से प्रयास को एक सार्थक उद्देश्यपरक मुहिम में बदल सकते हैं |
सबसे पहले मैं अपना मंतव्य स्पष्ट करना  चाहूँगा कि इस ब्लोग्ग के जरिये मैं सहकारिता में होने वाले  कार्यों तथा उससे जुड़े हुए सभी महानुभावों  को इस ब्लोग्ग के जरिये अपने विचार को  साझा करने के  लिए आमंत्रित करता हूँ | मैं स्वयं सहकारिता से जुड़कर अपना जीवन-यापन करता हूँ |  सहकारिता  विभाग  राजस्थान में मैं एक कार्मिक हूँ | मेरे समझ में सहकारिता  कभी एक जीवन दर्शन हुआ करती थी परन्तु आज इसे  वर्तमान से सामंजस्य बिठाने  की महती आवश्यकता हो गयी है |  निश्चित रूप से  यह  कमजोर वर्ग के लिए मूलतः लक्षित करके  उनकी संगठित शक्ति को शक्ति प्रदान करने के हथियार के रूप में उपयोग में लाई गयी है | लेकिन वर्तमान में कमजोर वर्ग इसका  उपयोग अपने बेहतरी  के लिए  नहीं  कर पा रहा है |  

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें